ऊपरवाले
“ हे
ऊपरवाले
तेरा
खेल
है
बड़ा
निराला
,
इंसान
को
जानवर
और
जानवर
को
इंसान
बना
डाला
!!
दिल
तो
मानव
को
दिया
,
पर
ईस्तमाल
करना
जानवर
को
सिखा
डाला “
“ कैसा यह कमाल कर डाला,
दानव को दुनिया से मिटा के !!
इंसान के दिल मे बसा डाला,
खुद की बसाई दुनिया को इतना बदल डाला !!
तेरे राह पर चलने वाले राहगीरों को,
रास्ते मे ही कुचल डाला “
“ हे ऊपरवाले तेरा खेल है बड़ा निराला
स्वर्ग लोक मे रहकर भूलोक को नरक मे बदल ड़ाला !!
हर उस शख्स को दुनिया से मिटा डाला,
जिसने अपना जीवन तुझे अर्पण है कर डाला !!
हर निराले को अचंभित कर डाला,
जब असंभव को भी तूने संभव कर डाला “
“ हे ऊपरवाले तेरा खेल है बड़ा निराला,
मिट गया दुनिया से तुझे ना मानने वाला !!
और मिट रहा है दुनिया से तुझे मानने वाला,
कितने ही रूपों को तूने दुनिया को दिखा डाला !!
पर फिर भी ना समझा सका की तू है क्या चाहने वाला “
“ इंसान को धर्मों के बिखराव मे बाँट डाला,
और मज़हब के नाम पे कत्लेआम करवा डाला “
“ हे
ऊपरवाले
तेरा
खेल
है
बड़ा
निराला
,
जो
समझ
गया
उसे
तूने
है
बुला
डाला !!
जो
ना
समझा
उसे
इस
भूलोक
मे
रंग
डाला “
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